Vinay Patel

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गुरुदेव की भावना

जल जाता हूं दीपक की तरह
लाने के लिए प्रकाश

नहीं है जिनके जीवन में कोई आस
विरले ही बचे हैं ऐसे गुरु आज

मिटा सकता नहीं  मैं
अंधकार जग का सारा

टिमटिमाता रहूं मैं
गरीब की झोपड़ी का दीपक बनकर आज

रचनाकार :- विनय कुमार पटेल

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1 Comments

बहुत ही सुंदर और बेहतरीन अभिव्यक्ति

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